भगवान कृष्ण को छप्पन भोग क्यों लगाया जाता है

हरे कृष्णा 


भगवान कृष्ण को छप्पन भोग क्यों लगाया जाता है







हम सब ने कई बार अपने आस -पास  मंदिरो मे देखा है और अपने बड़े बुजुर्गो से काफ़ी बार  सुना भी है  की भगवन श्री कृष्ण को छप्पन व्यंजनों का  भोग लगाया जाता है | लेकिन हमे इसके पीछे की कहानी और  कारण नहीं पता है कि आखिर छप्पन व्यंजनों  का ही भोग क्यों बड़ा प्रसिद्ध है |भगवान श्री कृष्ण को  लगाने को तो केवल जल और तुलसी पते का भोग भी भगवन को लगाया जाता है | श्रीमद भगवत  गीता मे भगवन कहते है कि  पत्रं पुष्पं फलं  तोयं अर्थात यदि कोई भक्त श्रद्धा व प्रेम भाव से मुझे केवल एक तुलसी का पत्ता, थोड़े से पुष्प और जल भेट करता है तो मैं उसे भी स्वीकार करता हूँ  और साथ में भगवन ये भी कहते है की अगर कोई व्यक्ति बिना श्रद्धा और बिना प्रेम भाव की चाहे मुझे कितने भी व्यंजनो का क्यों न भोग लगाए मैं  उसे स्विकार नहीं करता | तो इसलिए कहा जाता है की भगवन को कुछ भी अर्पण करे तो पूरी श्रद्धा और प्रेम भावना से करे | 


                                     


 

 तो चलिए  आज हम आपको बताते है की क्यों भगवन कृष्ण को छप्पन व्यंजनों का भोग लगाया जाता है |इसके पिछे कि कथा क्या है !


ऐसा कहा जाता है कि मईया यशोदा बाल कृष्ण को एक दिन में आठ बार भोजन कराया करती थी |पुराणों में एक कथा आती है की ब्रज के लोग इंद्र देव की पूजा - उपासना किया करते थे जिसमे वह यज्ञ और उनको भोग चढ़ाया करते थे ताकि इंद्र देव  उनसे प्रसन्न हो जाये और अच्छी बारिश करें और उनके यहा खेतो में अच्छा अनाज उगे और व्रज के लोगो को अनाज की कोई कमी ना पड़े | लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने अपनी असहमति जताते हुए व्रज के लोगो से कहा कि हमें ये सब करने की कोई जरूरत नहीं हैं क्युकि वर्षा करना इंद्र देव का कर्म है हमें उन्हें प्रसन्न करने के लिए अलग से कोई यज्ञ या पुजा उपासना करने की कोई जरूत नहीं हैं | और साथ ही भगवान कृष्ण इंद्र देव को सबक सीखना चाहते थे | तब जाके सभी ब्रज वासियों ने कृष्ण की बात मानी और इंद्र की पुजा-उपासना, यज्ञ आदि बंद कर दिया | तब इंद्र देव क्रोधित होकर व्रज वासियों को सबक सिखाने के लिए भारी वर्षा कर डाली |लगातार सात दिन और रात वर्षा होती ही रही जिस कारण पुरे व्रज में बाड़ आ गयी और जब इंद्र के प्रकोप  से सारे व्रजवासियों को बचाने के लिए भगवन श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी अनामिका ऊँगली पर उठाया था, तब जाके सात दिन बाद इंद्र देव का घमंड भगवान ने तोडा और फिर इंद्र देव ने वर्षा बंद कर दी | तब लगातार सात दिन तक भगवान कृष्ण ने अन्न जल ग्रहण नहीं किया था | आठवें दिन जब भगवान ने देखा कि अब इंद्र की वर्षा बंद हो गई है,तब भगवान ने सभी व्रज वासियों को गोवर्धन पर्वत से बाहर निकलने को कहा | 

तब दिन में आठ बार भोजन करने वाले व्रज के कृष्ण कन्हैया को लगातार आठ दिन तक भूखा रहना पड़ा और ये सब देख उनके व्रज के वासियों को और सबसे ज्यादा उनकी माता यशोदा को देखकर बहुत दुःख हुआ तब जाकर भगवान के प्रति अपनी अन्न श्रद्धा भक्ति दिखाते हुय सभी व्रजवासियों और माता यशोदा ने 7 दिन और आठ प्रहर के हिसाब से छप्पन व्यंजनों का भोग उन बाल कृष्ण को प्रेम पूर्वक भेंट किया और साथ में गोपियों ने भी अपने नटखट  कृष्ण को प्रेम पूर्वक खिलाया और भगवन ने भी उसे उतने प्रेम से खाया |

इसी के साथ हमरे धर्म ग्रंथो में एक और कथा आती है छप्पन भोग को ले कर कहा जाता है 

कृष्ण की गोपिकाओं ने कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए एक महीने तक सुबह यमुना नदी में स्नान किया और साथ ही कात्यानी माँ की पूजा-अर्चना की तब जेक भगवान श्री कृष्ण ने उनकी मनोकामना को स्वीकार किया और उन गोपियों को अपनी पत्नी रूप में स्वीकारा तब जाकर गोपियों ने उनसे प्रसन होकर भगवान श्री कृष्ण को छप्पन भोग लगाया |  

यह प्रथा आज भी अनेकों-अनेको मंदिरो में निभाई जाती है | भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिवस पर उनके भक्त आज भी उन्हें छप्पन भोग लगते हैं | 



तो हम उम्मीद करते है की आपको अब पता लगा गया होगा की क्यों लगाया जाता है आखिर  भगवान श्रीकृष्ण को छप्पन व्यंजनों का भोग इसके पीछे की कथा क्या है | 



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