हरे कृष्णा
आज हम आपको विश्व भर में बड़े हर्ष और उल्लास से मनाई जाने वाली श्री कृष्ण जन्माष्ट्मी के बारे में रोमांनचक और महत्वपूर्ण जानकारी देंगे | कि क्यों मनाई जाती हैं जन्माष्ट्मी | इसके पीछे का क्या कारण हैं |
जन्माष्टमी का पावन त्यौहार कब और क्यों मनाई जाता हैं
भगवान श्री कृष्ण जिनके कई हजारों नाम हैं कोई उन्हें कृष्ण बुलाता है, तो कोई माधव, तो कोई गोपाल तो कोई मुरलीधर इत्यादि | हर कोई उन्हें अलग - अलग नमो से बुलाता हैं | भगवान श्री कृष्ण जो सम्पूर्ण विश्व के स्वामि है, आदि नारायण जिनके अवतार है | जिन्होंने अलग -अलग युग में अलग -अलग अवतार लिए है | जिनका मुख्य कोमल कमल के समान है और जिनकी छवि सबको मोहित कर लेती है |जिन्होंने सभी गोपीयो के मन मोहित करें है |जो राधिका के प्रिय है और यो भगवान जिनकी सोला हज़ार पत्निया है |
उन भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य / जन्म दिवस पुरे विश्व में जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता हैं| भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में वासुदेव और माता देवकी के आठवें पुत्र के रूप में मथुरा नामक गाँव (जो की भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में है) के कारागार में जन्म लिया था | माँ यशोदा और नन्द के दुलारे भगवान श्री कृष्ण जिहोने अनेकों असुरों का अंत किया जिस मे से कंस एक अहम् है | जिन्होंने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठा ऊँगली पर उठाया |
भगवान श्री कृष्ण का जन्म/ प्रागट्य भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्ट्मी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्य रात्रि 12 बजे हुआ था | तो तब से लेकर आजतक सब लोग इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मानते हैं |
इस साल जन्मआष्ट्मी का पावन त्यौहार १८ अगस्त २०२२ को गुरुवार के दिन मनाया जायेगा |
जन्माष्टमी का त्यौहार न केवल भारत में मनाया जाता है विदेशों में बसे भारतीय भी इस त्यौहार को बड़े धूम धाम से लोग मानते हैं | इस दिन पूरी मथुरा नगरी योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण के रंग में रंग जाती हैं | कई दिनों पहले से ही मंदिरो को बड़ी सुन्दर रूप से सजाया जाता हैं | जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की एक झलक पाने के लिए भक्त दूर-दूर से मथुरा आते हैं | इस दिन पूरा मथुरा कृष्णमय हो जाता हैं | इस दिन कई स्थानों पर मटकी फोड़ने का भी कार्येक्रम होता हैं जिसमे अलग -अलग स्थानों से आई टोलिया माखन से भरी मटकी को फोड़ने का प्रयास करती है जो की कई फीट ऊपर रस्सियों से बंधी होती है और साथ ही अनेको झाकिया भी सजाई जाती है | इस दिन मंदिरो में विशेष रूप से भगवान की सुबह-सुबह मंगला आरती की जाती है और मध्य रात्रि 12 बजे पंचामित्र(दूध,दही,घी,गंगाजल और शहद) से अभिषेक किया जाता हैं और पूजा अर्चना की जाती हैं | इस दिन भगवान की अलग-अलग लीलाओं की झांकी भी सजाई जाती हैं और बाल गोपाल को झूले में बिठाकर झूला झुलाया जाता हैं |
इस दिन भक्त भी अपने -अपने घरों में पूजा अर्चना करते है लड्डू गोपाल का अभिषेक कर भगवान को सुन्दर -सुन्दर वस्त्र पहनाते है और अलग अलग व्यंजनों का भोग लगाते हैं इसमें भी विशेष कर माखन मिश्रि का भोग लगते हैं और अनेक मंदिरों तो भगवान को छप्पन भोग भी लगाया जाता है | इस दिन कई भक्त मध्यरात्रि तक उपवास भी रखते है और मध्र्य रात्रि को आरती के बाद अपना उपवास खोलते हैं |
जन्माष्टमी की रात्रि को मोह रात्रि भी कहा जाता है | इस दिन भगवान का ध्यान और महा मंत्र (हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे | हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ||) का जप करने से संसार की मोह माया से आसक्ति हटती हैं और भक्ति में मन भड़ता हैं |
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव निःसंदेह सम्पूर्ण विश्व के लिए आनंद मंगल का सन्देश हैं |
भगवान श्री कृष्ण जिन्होंने अर्जुन को कुरुक्षेत्र के युद्धस्थल में महान और दिव्य श्रीमदभगवत गीता का ज्ञान दिया था | जो अर्जुन के सारथी बने थे उनकी अनेको लीलाएँ व कथा कथा है वो हम आपके साथ किसी और दिन साझा करेंगे |
तो हम उम्मीद करते है की आपको अब पता चल गया होगा की क्यों और कब मनाया जाता जन्माष्टमी का महा उत्सव |

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