शनि देव जी आरती | जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी || Shani Dev Ji Aarti lyrics | Jai Jai Sri Shanidev Bhaktin Hitkari

ॐ  शन शनैश्चराय नमः 

भगवान शनि जो सूर्य के पुत्र है और माता छाया पुत्र के नाम से  जाने जाते है | भगवान शनि देव जो कर्म फल दाता हैं | जो मनुष्यो को उनके कर्मो के हिसाब से कर्मो का फल देते है | भगवान शनिदेव की सवारी चील है |  
शनिवार को शनि देव जी की आरती करने से और उन्हे सरसो का तेल चढ़ाने से वह  प्रसन होते है | और इसके साथ ही पीपल के वृक्ष और पवनपुत्र हनुमान /बजरंगबलि की भी पूजा की जाती है | शनिदेव जी का एक बहुत प्राचीन मंदिर महाराष्ट्र राज्य के अहमद नगर जिले में स्थित है | यहा श्रद्धालु भक्त बड़ी दूर-दूर से दर्शन करने आते है | आज हम आपको उनकी आरती बता रहे है |   









शनि देव जी की आरती

 

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी | 
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी || 
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी || 
( शनिदेव जी की जय हो |  शनिदेव जो कि सूर्यदेव और छाया माता के पुत्र है | शनि देव की जय हो शनिदेव हमेशा अपने भक्तों के भले के लिए ही सोचते है | जय जय श्री शनिदेव भगवान आप अपने भक्तों का ध्यान रखते है और उनके हित के लिए हमेशा करते है |) 



श्याम अंक वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी | 
नीलांबर धार नाथ गज की असवारी || 
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी || 
( शनिदेव जी की जय हो | श्याम श्रीकृष्ण जैसे आपका शरीर भी चतुर्भुज है | आपके पास भी चारों हाथ में अस्त्र और शास्त्र है | आपका रंग भी नीला है | और आप कौए की सवारी करते है | ( शनिदेव जी की जय हो |जय जय श्री शनिदेव भगवान आप अपने भक्तों का ध्यान रखते है और उनके हित के लिए हमेशा करते है |)




क्रीट मुकुट शीश सहज दिपत है लिलारी | 
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी || 
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी || 
( शनिदेव जी की जय हो | आपके सर पर भी एक मुकुट है जो की बहुत ही सुन्दर है और आपकी माला जो कि गले में सबसे ज्यादा सुन्दर लगती है | जय जय श्री शनिदेव भगवान आप अपने भक्तों का ध्यान रखते है और उनके हित के लिए हमेशा करते है |)




मोदक मिष्टान पान चढ़त है सुपारी | 
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी || 
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी |
 ( शनिदेव जी की जय हो | शनिदेव आपको लडुओं,मिठाई,पान और सुपारी चढ़ाई जाती है जो कि आपको बहुत पसंद है साथ में लोहा, कला तिल, सरसों का तेल, उरद की दाल के दाने आपको अत्यंत प्यारी हैं | जय जय श्री शनिदेव भगवान आप अपने भक्तों का ध्यान रखते है और उनके हित के लिए हमेशा करते है | )




देव दनुज ऋषि मुनि सुरत नर नारी | 
विशवनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी || 
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ||
( शनिदेव जी की जय हो | भगवान शनिदेव आपको भगवान, राक्षस, ऋषि, मुनि, आदमी, औरत आदि पूजते है और आपका सुमिरन करते है | विश्वनाथ आपका ध्यान करते है और आपकी शरण में रहते है | जय जय श्री शनिदेव भगवान आप अपने भक्तों का ध्यान रखते है और उनके हित के लिए हमेशा करते है |)







Shani Devji ki Aart


Jai Jai shree shanidev Bhaktan Hitkari |
Suraj Ke Putra Prabhu Chhaya Mahtari |
Jai Jai shree shanidev Bhaktan Hitkari ||
(Hail to Shani Dev ji, Shanidev, who is the son of Suryadev and Chhaya Mata. Hail to Shani Dev; Shani Dev always thinks only for the good of his devotees. Jai Jai Shri Shanidev Lord, you take care of your devotees and their interests. always do.)



Shyam Ang Vakra-Drishti Chaturbhuja Dhaari |
Nilambar  Dhaar Nath Gaj Ki Asawari ||
Jai Jai shree shanidev Bhaktan Hitkari ||
(Hail to Shani Dev ji. Your body is also a quadrilateral like Shyam Shri Krishna. You also have weapons and scriptures in all four hands. Your complexion is also blue. And you ride a crow. (Jai Ho to Shani Dev ji) Lord Shani Dev, you take care of your devotees and always do it for their benefit.)




Kreet Mukut Sheesh Rajit Dipat Hai Lilari |
Muktan Ki Maala Gale Shobhit Balihari ||
Jai Jai shree shanidev Bhaktan Hitkari ||
(Jai Ho Shani Dev ji. There is also a crown on your head which is very beautiful and your garland which looks most beautiful around your neck. Jai Jai Shree Shanidev Lord, you take care of your devotees and for their benefit. always do.)


Modak Mishthan Paan Chadat Hai Supari |
Loha, Til. Tel Udad Mahishi Ati Pyari ||
Jai Jai shree shanidev Bhaktan Hitkari ||
(Hail to Shani Dev ji. Shanidev, you are offered laddoos, sweets, paan and betel nut, which you like very much, along with iron, black sesame, mustard oil, urad dal grains are very dear to you. Jai Jai Shri Shanidev Lord, you take care of your devotees and always do for their benefit.)



Dev Danuj Rishi Muni Sumirat Nar Naari |
Vishwanath Dharat Dhyaan Sharan Hian Tumhari ||
Jai Jai shree shanidev Bhaktan Hitkari ||
(Hail to Shani Dev ji. Lord Shani Dev worships you as God, demon, sage, sage, man, woman etc. and worships you. Vishwanath meditates on you and stays in your shelter. Take care of them and always do it for their interest.)









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