भगवान विष्णु के 24 अवतार | Bhagwaan Vishnu Ki 24 Avtar

हरे कृष्णा 

आज हम आपको भगवान विष्णु के अवतार के बारे में बताएगे | 

 

हिन्दू धर्म में बह्रमा, विष्णु तथा महेष(शिव) को त्रिदेव बताया गया हैं जो कि सृष्टि की रचना, पालन और शंघार करते हैं|  इन्हीं त्रिदेव में से एक भगवान विष्णु के बारे में हम आज आपको जानकारी देंगे | 

भगवान विष्णु जो की इस सृष्टि का पालन- पोषण करते हैं उन्होंने  हर युग में समय -समय पर धरती पर लीला करने तथा बुराई का अन्त करने के लिए धरती पर किसी न किसी रूप में अवतार लेते है| उन्हीं अवतारों के बारे में हम आज आपको कुछ जानकारी देंगे | 

श्रीमद्भगवत गीता के अध्याय 4 के श्लोक 7-8 में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं :-

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत | अभ्युथानम अधर्मस्य तदात्मानं स्रजाम्यह्म || 

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृतामः | धर्मसंस्थापनार्थाय  संभवामि युगे -युगे ||   

( अर्थात जब - जब धरम की हानि और अधर्म का उत्थान धरती पर बढ़ जाता हैं , तब -तब मै दुस्टो का विनाश करने के लिए अलग - अलग युग में अवतार लेकर आता हूँ | )

सस्त्रो के अनुसार भगवान विष्णु के 24 अवतरा हैं लेकिन उनमें से 10 उनके प्रमुख अवतार हैं |जिसे दसावतार से भी जाना जाता हैं |  तो आज हम उन्हीं 10 प्रमुख अवतारों के बारे में  आपको जानकारी देंगे |


भगवान विष्णु के प्रमुख 10 अवतार 


मत्स्यावतार


मत्स्यावतार भगवान विष्णु का सबसे पहला अवतार हैं | भगवान विष्णु जो सृष्टि के पालन करता हैं | यह अवतार भगवान ने सबसे पहले युग सतयुग में लिया था | भगवान विष्णु ने यह अवतार वेदों को बचाने के लिए और साथ ही असुर हैग्रीव का सँघार करने के लिए लिया था | और साथ ही साथ वैवस्वत मनु, सप्तऋषिगण वः सरे जीव जन्तुओ को प्रथम कल्प की प्रलय से बचने के लिए लिया था |






कूर्म अवतार



कूर्म अवतार जिसे कछप अवतार भी कहते हैं यह भगवान का दूसरा अवतार माना जाता हैं |यह अवतार भी भगवान ने सत्युग में लिया था |  इस अवतार में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर में समुद्र मंथन के समय मंदार पर्वत को अपने पीठ (कवच) पर संभाला था | इस प्रकार भगवान विष्णु ,मंदार पर्वत और वासुकि सर्प की सहता से देवो और असुरों ने समुद्र मंथन करके चौदह रत्नो की प्राप्ति की | इसी समय भगवान ने मोहिनी रूप भी धारण किया था ताकि असुर समुद्र से निकले अमृत का  कर पाए | इस अवतार की और भी कई कथाएँ हैं जिसके बारे में हम आपको अलग से बताएंगे | 







वराह अवतार




वराह भगवान का तीसरा अवतार हैं | यह अवतार भी भगवान ने सत्युग में लिया था |  राक्षस हिरण्याक्ष ने जब पृथ्वी को जल डूबा दिया था तब भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर पृथ्वी को बचाया था | जब जब धरती पापी लोगो से कष्ट पति हैं तब तब भगवान अलग अलग रूप धारण कर इसके दुःख को दूर करते हैं |
  

         





नरसिंह अवतार 




भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं नरसिंह भगवान | यह अवतार भी भगवान ने सत्युग में लिया था | यह भगवान का सत्योग में अंतिम अवतार था | जो आधे मानव एव आधे सिंह के रूप में प्रकट हुए थे | जिनका सिर एव धड़ तो मानव का था लेकिन चेहरा एव पंजे सिंह के तरह थे | यह अवतार प्रमुख मन जाता हैं | इस अवतार में भगवान नेभक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए  हिरण्यकश का वध अपने जांघ पर बड़े -बड़े नाखूनों से किया था | 
 







 वामन अवतार 




भगवान विष्णु का अगला और पांचवा अवतार हैं वामन अवतार | यह अवतार भगवान ने त्रेता युग में लिया था | यह उनका पहला त्रेता युग का अवतार था | और यह भगवान विष्णु के पहले ऐसे अवतार थे जो  मानव रूप में प्रकट हुए | इसमें भगवान ने एक भ्रामण के रूप में अवतार लिया था | 










पशुराम अवतार






पशु राम भगवान विष्णु के छठे अवतार हैं | पशुराम त्रेता युग अवतरित हुए थे |यह एक भ्रमण ऋषि के यहा जन्मे थे | यह सस्त्र विद्या के महान गुरु थे | इन्होने भीष्म ,द्रोण व कर्ण को शार्स्त विद्या भी प्रदान की थी| कल्कि पुराण के अनुसार पशुराम , भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि के गुरु होंगे और उन्हें युद्ध की शिक्षा देंगे |







राम अवतार




राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार थे | यह अवतार भगवन ने सतयुग में लिया था | भगवान राम जो मार्यादा पुरुषोत्तम कहे जाते है  वह दसावतार में से प्रमुख अवतार माना जाता हैं | राम रघुकुल में जन्मे थे | जिसकी परम्परा रघुकुल रीति सदा चलि आई प्राण जाये पर बचन न जाये की थी | भगवान श्री राम जिन्होंने वचन के लिए चौदह साल का वनवास लिया |  भगवान श्री राम जिन्होंने रावण का वध किया था |भगवान राम जो एक आदर्श पुत्र , पिता ,पति और राजा थे | 








कृष्णा अवतार





भगवान श्री कृष्ण जो विष्णु के आठवें अवतार हैं | इन्होंने द्वापर युग में अवतार लिया था |यह सभी अवतार में से सबसे प्रमुख अवतार हैं | भगवान को कई अलग-अलग नमो से पुकारा जाता हैं जैसे मुरलीधर, कान्हा ,पार्थसारथी ,देवकीनंदन ,यशोदानन्दन और लीलाधर भी कहा जाता हैं |इन्हें लीला अवतार भी मन जाता हैं क्योकि इन्होंने धरती पर कई लीलाएँ की हैं |








गौतम बुद्ध





अगला अवतार भगवान का है गौतम बुद्ध जो भगवान के नौवे अवतार मने जाते हैं | इन्होने कलियुग में अवतार लिया था | इनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था | इन्होंने 29 वर्ष की आयु में अपनी पत्नी और बच्चे को त्यागकर संसार को जन्म ,मृत्यु ,दुःख से मुक्ति दिलाने के मार्ग और सत्य दिव्य ज्ञान की खोज में रात्रि में राजपाठ का मोह त्याग जंगल की और चले गये |सालों की कठोर तपस्या के बाद बोध गया में बोध वृक्ष के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और वे सिद्धार्थ से भगवान बुद्ध बन गए | 








कल्कि अवतार

 



भगवान विष्णु का दसवां और आखिरी अवतार कल्कि हैं | यह अवतार भी कलयुग में आने वाले समय में प्रकट होगा |इस अवतार में भगवान देवदत्त नामक घोड़े पर आरूढ़ होकर तलवार से दुष्टों का संहार करेंगे और तब सतयुग का प्राम्भ होगा | कल्कि अवतार कलयुग और सतयुग के संधिकाल में होगा | ग्रन्थ और पुराणों के अनुसार कलयुग में पापो के सीमा पर होने पर विश्व में दुष्टों के संहार के लिए कल्कि अवतार प्रकट होगा    




  


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हम आशा करते हैं की अब आपको भगवान विष्णु के प्रमुख दस अवतार के बारे में जानकारी मिल गई होगी | 
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